प्रत्येक विद्यार्थी के अंदर सुप्त देवत्व विद्यमान हैै । आवष्यकता है – इसे प्रकट करने की । इस सुप्त देवत्व का प्रकटीकरण ही षिक्षण कार्य है। विद्यार्थी के अंदर योग्यता, ज्ञान और बल प्रकृति प्रदत्त है। हमारा संकल्प गुरूकृपा सेे गुरूकुल की षिक्षण प्रणाली द्वारा ऐसी योग्य एवं प्रतिभावान युवापीढ़ी का निर्माण करना है, जो भारत को विष्व गुरू बनाने के लिए संकल्पित हो।